ज्ञान के विषय में सही समझ ना होने के कारण लोग ज्ञानप्राप्ति के लिए बहुत कष्ट उठाते है। वर्तमान में बहुत से लोग अधिक से अधिक जानाकारीयाँ एकत्रित करने में जुट जाने की वजह से अध्ययन बोझ होने लगता है और उससे बीमारियाँ और विकार बढ़ने लगते हैं। इसलिए अद्वैत के सभी महात्माओं ने इसे टालने के लिए कहा है। अष्टवक्र गीता के सोलहवें अध्याय में कहा गया है कि ‘स्वास्थ्यं सर्वविस्मरणादृते’ ज्ञानेश्वर माऊली ने भी ज्ञान का बोझ न हो इसलिए मनुष्य के जीवन उद्धार के लिए केवल ९ पदों में सुंदर जीवन का संपूर्ण सार प्रदान किया है।पसायदान की ९ ओवीओं में जीवन के सभी स्तरों की समस्त समस्याओं का उत्तर मिलता है। इसे पढ़कर संत ज्ञानेश्वर महाराज की साधना और ऊर्जा का फल पढ़ने वाले को आशीर्वाद के रूप में आसानी से प्राप्त होता है। इन ९ ओवीओं में केवल शब्दार्थ ही नहीं बल्कि उन्हें गहन भावार्थ से समझना चाहिए। जीवन में सहजता एवं समता खोजने वाले सभी लोगों कलिए यह अत्यंत मार्गदर्शक साबित होगा। हमारे इस दृढ विश्वास के पीछे का मुख्य कारण यह है कि जिन्होंने इसे आत्मसात कर लिया वह अपने जीवन में परम समाधान का अनुभव कर रहे हैं।माऊली का पसायदान केवल ९ पदों का होते हुए भी उसका गहन भावार्थ समुद्र जैसा है इसका संपूर्ण सार प्रत्यक्ष रुप से समझाना संभव नहीं है फिर भी जितना संभव हो सके उतना प्रयास ईमानदारी से किया गया है। सभी पाठकों से विनम्र अनुरोध है कि आप सभी इसका मनोभाव से स्वीकार करें। विभुश्री का संक्षिप्त परिचय। जिस प्रकार कुशल प्रशिक्षकों से ड्राइविंग कौशल सुरक्षा नियमों और बेहतर सड़क नियमों को सीखकर ही सर्वश्रेष्ठ चालक बनने की मजबूत नींव तैयार होती है उसी प्रकार विभुश्री के मार्गदर्शन में पसायदान सीखना एक शांत संतुलित और स्थायी विकास की ओर ले जाता है।2012 में एक निकट-मृत्यु अनुभव ने बोधमार्ग फाउंडेशन की स्थापना की।नाद योग विषय पर उनकी निपुणता एवं ध्वनि तरंगों द्वारा स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और इस विषय के स्रोत स्पंदन शास्त्र पर उनकी विशेषज्ञता को वर्ष 2017 में टाइम्स समूह द्वारा स्वीकार किया गया।तर्क पर आधारितआधुनिक जगत के लिए इस दिव्य ज्ञान को वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए फैलाने का लक्ष्य रखते हैं।पसायदान के ज्ञान को उजागर करते हुए यूनेस्को - 22 सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में सम्मानित।