मेरी माँ मेरी दुनिया हैं जिनके कारण मेरा अस्तित्व और पहचान है। वे एक छोटे से शहर में संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी जहाँ उनकी नानी ने उन्हें अच्छे संस्कार दिए। सत्संग में सोते हुए भी माँ के मन में धार्मिक और नैतिक मूल्यों के बीज पड़े जो आज उनकी जीवनधारा हैं।