प्रिया कक्षा पाँच की होशियार बच्ची थी जिसे कहानियाँ लिखना पसंद था। पापा ने उसे कहानियाँ रिकॉर्ड करने के लिए मोबाइल दिया लेकिन वह गेम्स और रील्स में उलझ गई। धीरे-धीरे पढ़ाई और लेखन से उसका ध्यान हट गया। मम्मी ने उसे उसके सपने की याद दिलाई। टीचर की बातों से प्रेरित होकर उसने अपनी डायरी फिर से उठाई और समझ गई कि असली खुशी उसकी कल्पनाओं की दुनिया में है।