यह एक भावनात्मक और गहरी कहानी की झलक है जिसमें शालविका का अकेलापन पछतावा और तकनीक से घिरा भविष्य चित्रित किया गया है। क्या आप इसे किसी विशेष उद्देश्य के लिए संक्षेप में चाहते हैं28 दिसंबर 2040 की ठंडी रात शालविका अपनी व्हीलचेयर पर अकेली थी। पति को खोने का दर्द रोबोटिक घर की नीरवता और पछतावे का बोझ असहनीय था। आईने के सामने उसने चीखकर कहा काश मैं समय की घड़ी पीछे ले जा पाती! लेकिन समय कभी नहीं लौटता बस यादें रह जाती हैं।