<p class=ql-align-justify><em style=color: rgba(0 32 96 1)>ईश्वर के अपने देश के देवता</em><span style=color: rgba(0 32 96 1)> &nbsp;एक ओझल हुई संस्कृति और उसके आसपास के समुदायों की याद दिलाते हैं। तेय्यम केरल - ईश्वर के अपने देश भारत में द्रविड़ संस्कृति को दर्शाता अनुष्ठानों से पूर्ण एक कला रूप है। यह पुस्तक तेय्यम उसे जुड़े सुंदर चित्र और सैकड़ों कहानियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। हम यह पुस्तक तेय्यम कलाकारों को समर्पित करते हैं जो लोगों के लोगों के द्वारा लोगों के लिए वास्तविक देवता हैं।</span></p><p class=ql-align-justify><span style=color: rgba(0 32 96 1)>अपने प्रबंधन परामर्श और स्वयंसेवी कार्यो के दौरान लेखक को पिछले तीन दशकों और लगभग बीस देशों में अपने कैमरे के साथ विचरण करने और सत्य को करीब से देख पाने में ईश्वर की अद्भुत कृपा-दृष्टि रही है; उसने अभी तक ऐसी कोई जगह नहीं देखी है जहाँ एक समय में 500 से अधिक देवता पृथ्वी पर उतरते हो। पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला (यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल) और विशाल अरब सागर के बीच बसा प्राकृतिक हरियाली से आच्छादित उत्तरी मालाबार के पहाड़ी इलाको के थेय्यम देवता वहां के दबे-कुचले बासिंदों को गले लगाने के लिए अपने असामान्य रास्ते खोल देते हैं। श्रेय उन तेय्यम देवताओं को जाता है जिनके कारण मालाबार क्षेत्र वास्तव में एक पहाड़ी पर बसा देदीप्यमान शहर बन सका है। ये देवता पोशाक डिजाइनर चित्रकार संगीतकार कारीगर ड्रमर और कोरियोग्राफर के रूप में असंख्य हो जाते हैं। वे मानव लोकों को पार कर रहस्यमय रूप प्राप्त कर लेते हैं जहां वे भारी-भरकम परिधान को सहज रूप से धारण कर धधकती आग पर विहार करने में समर्थ हो जाते हैं।</span></p>