<p><strong>परमेश्वर अच्छा है एक सच्ची कहानी है एक ऐसी महिला की जिसने अस्वीकृति अपमान और वर्षों के मौन दुःख को सहा - और जाना कि परमेश्वर की भलाई ने उसे कभी नहीं छोड़ा।</strong></p><p></p><p>युद्धकालीन चीन में जन्मी और ऐसे समाज में पली-बढ़ी जहाँ पुत्रों को पुत्रियों से अधिक महत्व दिया जाता था मार्गरेट लियू कॉलिन्स ने बचपन से अदृश्य महसूस करना सीखा। पत्नी और दो बच्चों की माँ बनने के बाद वह एक ऐसे विवाह में फँस गईं जो अपमान और भावनात्मक उत्पीड़न से भरा था। बच्चों की रक्षा और गरिमा बनाए रखने के प्रयास में उन्होंने गहरे और अनदेखे घाव अपने भीतर सँजोए।</p><p></p><p>ऐसे समय भी आए जब निकलने का मार्ग दूर लगता था और आशा क्षीण पड़ती थी।</p><p></p><p>फिर भी इस संघर्ष में उनका विश्वास समाप्त नहीं हुआ - वह और गहरा हुआ। परमेश्वर से दूर होने के बजाय उन्होंने स्वयं को समर्पित करना सीखा उसकी अगुवाई को पहचानना और कदम-दर-कदम भरोसा करना सीखा। परिवर्तन अचानक नहीं आया; वह प्रार्थना आज्ञाकारिता और धैर्य से धीरे-धीरे प्रकट हुआ।</p><p></p><p>समय के साथ जो हानि प्रतीत होती थी वही नए आरंभ की नींव बनी। परमेश्वर की अगुवाई में नए द्वार खुले। उन्होंने जीवन पुनः स्थापित किया पहचान पुनः पाई और अंततः रियल एस्टेट में सफल करियर बनाया - पूरी यात्रा में परमेश्वर के विश्वासयोग्य हाथ को पहचानते हुए।</p><p></p><p>यह व्यक्तिगत मसीही आत्मकथा उन महिलाओं से संवाद करती है जो मौन पीड़ा सह रही हैं उन प्रवासियों से जो सांस्कृतिक संघर्षों से गुजर रहे हैं और उन सभी से जो जीवन की अंधेरी घाटियों में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को देखना चाहते हैं।</p><p></p><p>यदि आप आशा चंगाई और इस विश्वास की खोज में हैं कि परमेश्वर हर परीक्षा में उपस्थित है तो यह पुस्तक स्मरण कराएगी कि दुःख के बीच भी परमेश्वर अच्छा है।</p>
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