संस्कृत भाषा के विशाल एवं बहुमुखी साहित्य सृजन में अनेक कवियों की प्रतिभा का विकास एवं विलास दृष्टिगत होता है। प्रत्येक कवि ने अपनी अद्भुत लेखन कौशल से भावों की सूक्ष्मता को अभिव्यक्त करने वाले मर्मस्पर्शी काव्यों की रचना की है। संस्कृत कवियों की इस रत्नावली से कतिपय कवियों का कालक्रमानुसारेण विवेचन इस पुस्तक के लेखन के अवसर पर मेरा एक उद्देश्य रहा है। संस्कृत साहित्य में जहाँ महर्षि वाल्मीकि एवं व्यास जैसे देश तथा काल की अवधि के द्वारा अपरिच्छिन्न महाकवि अश्वघोष जैसे स्वाभाविक तथा प्रभावोत्पादक कविता करने वाले गुणी सुकवि कालिदास जैसे कमनीय कविता करने वाले महान कवि हैं वहीं भास भवभूति विशाखदत्त एवं शूद्रक जैसे नाटककार तथा सुबंधु दंडी एवं बाणभट्ट जैसे गद्यलेखक और जयदेव प्रभृति गीति-काव्य के लेखक विद्यमान हुए। ऐसे संस्कृत साहित्य की कवि परम्परा का किसी एक ग्रंथ में समुचित विवेचन करना अत्यंत दुष्कर था। इसके पश्चात् मेरा प्रयास रहेगा कि इस पुस्तक में संकलित कवियों के अतिरिक्त अन्य प्रतिनिधि कवियों का विश्लेषण अपनी आगामी पुस्तक के माध्यम से विद्वज्जनों एवं संस्कृत साहित्य में अभिरुचि रखने वाले विद्यार्थियों के समक्ष प्रस्तुत करूँ। इस संदर्भ ग्रंथ को पूर्णतया समीक्षात्मक दृष्टि से लिखा गया है। वर्ण्य-विषय की सरलता एवं सुबोधता पर यथाशक्ति ध्यान दिया गया है। संस्कृत साहित्य के कवियों के इतिहास एवं उनके परिचय पर आधारित उपलब्ध अन्य कृतियों से सर्वथा पृथक् एक नवीन लेखन शैली का भी प्रयोग किया गया है। मुझे आशा है कि यह कृति संस्कृत भाषा एवं साहित्य के अनुरागी सहृदयों के हृदय में अपना स्थान बना पाएगी।