रामायण और सिविल इंजीनियरिंग दोनों ही ऐसे महत्वपूर्ण विषय हैं जिनका अपने-अपने क्षेत्रों में बहुत अधिक महत्व स्वतः स्थापित है। इस पुस्तक में लगभग भिन्न से समझे जाने वाले इन दोनों ही महत्वपूर्ण विषयों का संयुक्त रूप से अध्ययन एवं दर्शन करने का प्रयत्न किया गया है। इस संयुक्त अध्ययन का सबसे बड़ा परिणाम यह होता है कि रामायण और इंजीनियरिंग से संबंधित वर्ग के साथ -साथ यह दर्शन विश्लेषित होते हुए समाज के सभी व्यक्तियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी हो जाता है। सिविल इंजीनियरिंग के सबसे प्रमुख हितधारक (stakeholder) होने के नाते प्रत्येक सामान्य नागरिक का संबंध इस विश्लेषण से स्वाभाविक ही या एक आवश्यकता के रूप में भी जुड़ता है। इसी तरह से रामायण के प्रसंगों को जान कर उनसे आज के समय में कुछ व्यवहारिक लाभ प्राप्त करने के लिए उत्सुक पाठक वर्ग के लिए भी यह विश्लेषण महत्व का हो जाता है।