हर वह वस्तु जो जीवन में आई उसे कला की कसौटी पर कसने की आदत बन गई। कला एवं कलाकार में पैदा हुई रुचि ने कलाकारों की कृतियों एवं उनके जीवन को समझने की जिज्ञासा पैदा की। इसके साथ कालजयी एवं अमर कृतियों के कारण पर अनुसंधान शुरू हो गया। इसी अनुसंधान में भारतीय दर्शन से गुजरते हुए उसके मूल में स्थित अध्यात्म को कलाकृतियों की पूर्णता में सहयोगी पाया। अपने विचार को पुष्ट करने के क्रम में मैंने कुछ सुप्रसिद्ध कलाकारों के विचार जानने का भी प्रयास किया। जिनकी शब्दावली एवं अभिव्यक्ति का ढंग भिन्न जरूर था किंतु कला की पूर्णता एवं कालजयी कृतियों के सृजन में अध्यात्म की उपस्थ्ति को सभी ने अनिवार्य माना।