प्रेम एक एहसास है जिसमे अपनी नहीं सिर्फ मन की मर्जी चलती है। जो दिमाग से नहीं दिल से होता है और इसमें अनेक भावनाओं व अलग अलग विचारो का समावेश होता है। प्रेम स्नेह से लेकर खुशी की ओर धीरे धीरे अग्रसर करता है। ये एक मज़बूत आकर्षण और निजी जुड़ाव की भावना है जो सब भूलकर मन को उसके साथ जाने को प्रेरित करती है।ये प्रेम हमारे शरीर मन और आत्मा को प्रभावित करता है। कहते है उत्कंठा तृष्णा के कारण प्रेम अधूरा है। उसका प्रेम असीम है और अनन्तता में कभी पूर्णता संभव नहीं। उसका प्रेम अनन्त अपूर्णता में पूर्ण है। प्रेम के पथ का कोई अंत नहीं।इसी विचारों पर आधारित मेरी प्रेमकाविताओ से भरी पुस्तक मनमर्जियां जो सच्चे मन से प्रेम करते है उनको समर्पित करती हूं।
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