लेखक परिचयएक छोटे शहर में पैदा होने से पलकर बड़ा होने से जीवन के शुरूआती दौर में सोचने का दायरा छोटा होता है लेकिन जीवन के बुनियादी मुल्यों से कस कर बंधा रहता है जोकि बड़े शहरों की नई सभ्यताओं के नये परिवेश की चुस्त सी रफतार में कहीं कहीं धूमल हो जाता है।बचपन में स्टेज और नाटक के मौके नही मिलते थे..... सिर्फ रेडियों में क्रिकेट की कमैंट्री सुनकर उसकी नकल लगाकर जो तालियां बटौरी उनकी गूंज से लगा कि कोई कलात्मक सोच अन्दर ही अन्दर उपज रही है। फिर कॉलेज के दिनों में नाटक करना लिखना मौनो एक्टिंग करना तथा अन्तर विश्वविद्यालय की प्रतिर्स्पधाओं के अवार्ड हासिल करना। लेकिन इन सबको वास्तविक रूप नाटक विभाग चण्डीगढ़ में एम.ए.करना और नाटकों के लिये पंजाब यूनिवर्सिटी के लिये यू.जी.सी. पास करने वाला पहला छात्र बनना तथा नाटकों पर रिसर्च करना तथा नाटकों में फ्रीलांसर बन कर ही मिला। बाद में एन.ज़ैड.सी.सी. में कल्चरनल कोआर्डिनेटर की जॉब करना दूरदर्शन में कार्य करना तथा दिल्ली के नाटकों से जुड़ना। नाटकों के लिये हर तरह के काम किये जैसे स्टेज लाईटिंग मेकअप स्टेज सैटिंग राईटिंग एक्टिंग एंड डायरैक्शन अनेकों नैशनल लैवल के प्लेज़ और देश-विदेश की हस्तियों के साथ काम करने का मौका मिला। नाटक के लिये विदेश में शोज़ जैसे यू.एस.ए. आदि में भी किये गये। लेकिन जो संतुष्टि नाटकों के अध्यापक के तौर पर 18 साल तक काम करके मिली शायद और कहीं नहीं। यह मेरी नाटकों की किताब इन सब का असली परिचय प्रस्तुत करेगी। नाटकों में हज़ारों स्टूडैंटस को शिक्षा देना इंस्टीटियूशन में रह कर और बाहर थियेटर वर्कशॉपस का संचालन करना हर रोज़ का कार्य बन गया था। साथ ही कुछ फिल्मों में काम करना और रेडियो टैलीविज़न पर अत्यधिक काम करने का मौका मिला। 80-80 ऐपिसोडस के नाटकों में मुख्य भूमिका निभाना इस यात्रा को और सुगम बनाता चला गया। कई फैस्टिवलज़ चाहे स्टेट लैवल और नैशनल लैवल के हो उनमें निर्णायक मण्डल का भागीदार भी बनाया गया। कई अवार्डस भी मिले। मैंने सैंकड़ों नाटक लिखे जोकि सारे रिहर्सल करते हुये स्टूडैंटस के साथ ही लिखे। परन्तु इन सब में से कुछ को प्रकाशित करने का मेरा यह पहला प्रयास है। आशा करता हूं आप इन सब का आनन्द उठायेंगे और इन सब में मेरे गहरे लम्बे तजुर्बा की खुशबू को कहीं-कहीं हासिल अवश्य करेंगे। धन्यवाद