लेखक परिचयविकास जायसवाल एक साहित्य इतिहास और संस्कृति प्रेमी लेखक हैं जिनकी लेखनी भारतीय परंपराओं ऐतिहासिक घटनाओं और लोक संस्कृति के गहरे अध्ययन पर आधारित होती है। वे विशेष रूप से छत्तीसगढ़ कलचुरी वंश भारतीय इतिहास और पौराणिक कथाओं से जुड़ी कहानियों को रोचक और शोधपरक शैली में प्रस्तुत करते हैं। उनका लेखन न केवल ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करता है बल्कि संस्कृति और समाज के प्रति उनकी गहरी समझ और संवेदनशील दृष्टिकोण को भी दर्शाता है। वे बस्तर दशहरा जैसे अद्वितीय विषयों पर लाल अमराइयाँ छत्तीसगढ़ के नक्सलियों पर व् अतीत का दरवाजा जोकि कलचुरी वंश से जुडी एक फिक्शन कहानी पर शोध कर इसे जनमानस तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि हमारी समृद्ध परंपराओं का संरक्षण हो सके। विकास जायसवाल न केवल एक लेखक हैं बल्कि एक विचारक शोधकर्ता और समाजसेवी भी हैं। वे जायसवाल समाज कल्याण समिति के युवा अध्यक्ष है और आगामी युवा कलचुरी कलार समाज महासभा सम्मेलन के आयोजक भी हैं जिसमें समाज के युवाओं को संस्कृति इतिहास और सामुदायिक विकास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। उनकी लेखनी का उद्देश्य इतिहास को नई दृष्टि से प्रस्तुत करना और समाज में जागरूकता फैलाना है। उनका मानना है कि संस्कृति और परंपराएँ केवल अनुष्ठानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि उन्हें नई पीढ़ी को समझाने और प्रेरित करने का माध्यम बनाना चाहिए।भांचा राम के गोंठछत्तीसगढ़ की मिट्टी में रामकथा की जड़ें गहरी हैं। माता कौशल्या की जन्मभूमि और भगवान राम के वनवास की साक्षी यह भूमि अपनी लोकसंस्कृति में रामायण को जीवंत रखे हुए है। तुलसीदास जी महाराज रचित श्री रामचरितमानस से पूर्णतः प्रभावित होकार बहुत ही सूक्ष्म रूप में भांचा राम के गोंठ लिखी है इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए रामकथा को छत्तीसगढ़ी लोकछंदों - सोरठा चौपाई और दोहा के माध्यम से प्रस्तुत करता है जिससे यह सहज सुगम और गेय बने। यह ग्रंथ केवल एक धार्मिक कथा नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है जो भगवान राम को भांचा (भांजा) के रूप में देखती है। जो छत्तीसगढ़ और रामायण के गहरे संबंध को दर्शाती है। भांचा राम के गोंठ न केवल पढ़ने के लिए बल्कि सुनने और गाने के लिए भी उपयुक्त है। यह छत्तीसगढ़ी भाषा और उसकी परंपराओं को समृद्ध करते हुए रामकथा को घर-घर तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है। जय श्रीराम!