<p>ध्रुवन लढ्ढा द्वारा लिखी गई यह रचनाएं सचाई का एक जीता जागता रूप है जो है सो है और जो है वो ही शब्दों मैं पिरोया है। आपको यह कविताएं इसलिए पसंद नहीं आयेगी की इनमें बोहोत बड़े बड़े शब्दों का प्रयोग किया है मगर इसलिए पसंद आयेगी क्योंकि सरल भाषा मैं सिख देना ही इन कविताओं का उदेश्य हैं</p>