कथामृत प्रसंग के इस खंड में (खंड ११) जगदीश्वर के स्वरुप उनकी व्याप्ति ज्ञान - विज्ञान संसार वृक्ष और उस मान्यता से सम्बन्ध रखनेवाके विसगायों पर चर्चा की जायेगी। यह तो सर्वजन विदित सत्य है ही कि प्रकृति के हर अवयव में जगदीश्वर का निवास है; उस जगदीश्वर के अंश विषयक सन्निधि को पहचान लेना और अनुभव कर लेना ही व्यक्ति जीवन का ध्येय माना गया। उसी साधना पथ पर भक्त को निरंतर लगे रहना है; उपासना भी करना है और उपास्य के शरणागत भी रहना होगा।