बिना नुक्ता लगाए उर्दू के प्रचलित शब्दों का प्रयोग रवि प्रकाश की हिंदी गजलों की विशेषता है ।परिदृश्य को कवि ने अपने दृष्टिकोण से देखा और आत्मसात किया है। सरलता से अपनी बात कहने का प्रयास इन गजलों में पाठक देख सकते हैं। पुस्तक में प्रतीकों के माध्यम से भी बहुत कुछ कहा गया है। एक शेर देखिए:/उन्हें मालूम है उड़कर कभी वापस नहीं आते/परिंदे अपने बच्चों को मगर उड़ना सिखाते हैं