यह पुस्तक एक भावनात्मक और काव्यात्मक रचना है जिसमें इंसानी जीवन के तीन गहरे पहलुओं—ख़्वाब (सपने) हक़ीक़त (वास्तविकता) और अल्फ़ाज़ (शब्द)—के बीच के संबंध को बहुत संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है। जैसा कि शीर्षक से ही स्पष्ट है यह किताब उस स्थिति को चित्रित करती है जब ख़ामोशी भी बोलने लगती है और शब्द केवल आवाज़ नहीं बल्कि भावनाओं की गूंज बन जाते हैं।