“मगर कब तक” (KK Publications) एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक साहित्यिक कृति है जो जीवन के संघर्षों सामाजिक अन्याय और मानवीय सहनशीलता की सीमाओं को उजागर करती है। इस पुस्तक में पात्रों के माध्यम से यह दिखाया गया है कि व्यक्ति कब तक परिस्थितियों पीड़ा और असमानता को सहता रहेगा और कब बदलाव की दिशा में कदम उठाएगा। कहानी में सामाजिक चेतना आत्ममंथन और परिवर्तन की भावना प्रमुख रूप से दिखाई देती है। KK Publications ने इसे सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया है जिससे विद्यार्थी और सामान्य पाठक जीवन के यथार्थ और सामाजिक प्रश्नों को बेहतर समझ सकें।
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