जब कवि भावों की सरिता में बहता है तो कागज़ पर उतार देता है दिल की लहरों को और पाठक उन लहरों में डुबकी लगा कर कवि के भावों को चखता है। कविता अपने दायरे में धरती आकाश जड़ चेतन सभी को समेट लेती है। छंदों में बंधी होकर छंदमुक्त कविता का सहज सरल रूप ह्रदय में उतर जाता है। ऐसा ही कुछ कवियत्री रुचि गौतम पंत जी की कविता संग्रह “फ़ख़्र” में हैं।
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