''क्षितिज के सन्नाटे पर’ 67 कविताओं का एक संग्रह है जिसे सबसे उपयुक्त रूप से विविधता भरे मिश्रण के रूप में वर्णित किया जा सकता है। इस रचना को शुद्ध रूप से कविता के प्रति गहरे प्रेम से सराबोर भावों से लिखा गया है। प्रत्येक कविता हृदय की गहराइयों से निकली है और भावनाओं के उतार-चढ़ावों की यात्रा का वर्णन करती है। कभी-कभी ये शब्द प्रकृति की मखमली हरियाली में लिपट जाते हैं और कभी ये रिश्तों में गहराई से प्रवेश करते हैं। समय-समय पर ये आध्यात्मिकता की ओर भी प्रवाहित हो जाते हैं। क्योंकि यह संग्रह आत्मकथात्मक है इसलिए जिन लोगों ने अपने घर से दूर रहकर अपने प्रियजनों से दूर होकर या किसी आंतरिक संघर्ष से गुजरकर जीवन के उतार-चढ़ाव देखे हैं वे इस संग्रह से गहरा नाता महसूस करेंगे। डॉ. पुष्पा बिष्ट का जन्म देहरादून में हुआ जिसे स्नेहपूर्वक दून घाटी कहा जाता है जो भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। उन्होंने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की। वह सैम कैस्टेलिनो के ‘ डेटलाइन स्कूल ऑफ जर्नलिज्म ’ की पूर्व छात्रा हैं। इसके बाद उन्होंने ढाई से अधिक दशकों तक शैक्षिक क्षेत्र में एक सफल करियर बनाया। वह ‘ इंडिया इन ग्लोबल इकोनॉमी: बियॉन्ड रिफॉर्म एंड रेटॉरिक ’ की लेखिका हैं और उनके कई लेख प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। उनके शैक्षिक विशेषीकरणों में राजनीतिक अर्थशास्त्र अंतर्राष्ट्रीय संबंध और शांति अनुसंधान शामिल हैं लेकिन साहित्य और कविता उनके दिल के बेहद करीब हैं।
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