<p><i>“शाख़ पर रह कहाँ मुमकिन था मेरा ये सफ़र अब हवा ने अपने हाथों में सम्भाला है मुझे”</i><br/> वक़्त की अलसायी आँखों में ख़ुमार है ज़िंदगी है तो ख़ुशियाँ-ग़म भी बेशुमार हैं।<br/> बेशक रोशनी भी मद्धम सही बेख़ौफ़ बेबाक़ लम्हे भी कम सही इन कदमों में न ज़्यादा दम सही चेहरा वक़्त का बेरहम सही<br/> ले शपथ हो निडर निर्भीक मंज़िल ढूँढ ही लूँगी ना थकूँगी ना थमूँगी<br/> हर लम्हा बेख़ौफ़ खेला है वक़्त की हर आहट को संजीदगी से झेला है।<br/> फ़ैलाए अपने “नवरंग” पंख पुरज़ोर किया है नाद-शंख<br/> जश्न बनूँ किसी की ज़िंदगी का एक उजला दिया किसी की घन अमावस रात का ॥</p> <p><b>लेखिका परिचय</b><br/> वर्तमान में अपनी निजी कंपनी में निदेशक के पद पर कार्यरत <b>कविता यादव</b> बहुमुखी प्रतिभा की धनी हैं।<br/> विधि स्नातक तथा व्यवसाय प्रशासन में स्नातकोत्तर की डिग्री के पश्चात इन्होंने नामी निजी कंपनियों में लंबे समय तक कार्य किया।<br/> शिक्षा की ओर इनका विशेष झुकाव रहा और कुछ शैक्षिक पुस्तकों के लेखन में भी योगदान दिया।<br/> सदा से लेखन में रुचि रखने वाली कविता यादव का यह संकलन उनकी साहित्यिक यात्रा का दूसरा कदम है।<br/> एक लेखिका कवयित्री के अतिरिक्त वह एक उत्कृष्ट चित्रकार भी हैं।</p>
Piracy-free
Assured Quality
Secure Transactions
Delivery Options
Please enter pincode to check delivery time.
*COD & Shipping Charges may apply on certain items.