धागों की दुनिया

About The Book

<p>हर जीवन एक धागा है। जो कभी जुड़ता है कभी बिखरता है।</p><p>यह उपन्यास आर्या नामक एक ग्रामीण लड़की की यात्रा है जो अपनी माँ की बीमारी समाज के अन्याय और आत्मिक प्रश्नों से जूझते हुए जीवन की सच्चाई तलाशती है।</p><p>वह जानकी रेवा विद्याधर लालू और विवेक जैसे पात्रों से मिलती है। जो जीवन के अलग-अलग धागों को उसके सामने खोलते हैं।</p><p>धागों की दुनिया केवल एक कहानी नहीं बल्कि आत्मा की खोज करुणा और सत्य की ओर बढ़ता हुआ एक मौन संवाद है।</p><p>यह उपन्यास हमें यही सोचने पर मजबूर करता है। क्या हम सच में जी रहे हैं? या केवल जीने का अभिनय कर रहे हैं?</p><p> </p>
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