# मुझे लगता है कि भारत देश में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रवाद का वास्तविक अर्थ जानना बहुत आवश्यक हो गया है...…एडॉल्फ हिटलर को ज्यादातर क्रूर तानाशाह के रूप में जाना जाता है...पर यह कैसे हुआ कि एक सामान्य परिवार में जन्मा बच्चा जो एक कलाकार (आर्टिस्ट) या पादरी बनना चाहता था इतना क्रूर तानाशाह किस कारणवश बना??? क्या थी उसकी सोच क्या थे उसके विचार क्यों नरसंहार के लिए एडॉल्फ हिटलर को ही जिम्मेदार माना जाता है? ऐसे और कई जघन्य अपराध के लिये क्यों हिटलर को ही दोषी माना जाता है?... वे लोग कौन थे कैसे विचारवंत धर्मशास्त्री एवं प्रभावशाली व्यक्तिमत्व वालें लोग थे जिनका प्रभाव हिटलर के मानसिक विचारों पर पड़ा… जिसका परिणाम Holocaust (प्रलय) के रूप में लोगों ने अनुभव किया...# एडॉल्फ हिटलर अकेला नरसंहार के लिए जिम्मेदार नहीं था चूँकि यहूदी विरोधी भावना ईसा काल से ही समाज में फैली हुई थी एडॉल्फ हिटलर तो बस एक अंतिम चरम बिन्दु बना था……# निश्चित ही एडॉल्फ हिटलर के यहूदी विरोधी विचारधारा को खंडित (विरोध) किया जाना चाहिए... ये कैसा राष्ट्रप्रेम है जो अंत में राष्ट्रवाद बन गया... इसे समझने के लिए आपको यह किताब पूर्वग्रह दुषित विचारों को छोड़ के पढ़नी होगी ताकी हम हिटलर के अन्य विचारधाराओं के पहलुओं को जान सकें...… क्यों मैं एडॉल्फ हिटलर को राष्ट्रभक्त कहने की हिम्मत कर रहा हूं?...ऐसा क्यों?... यह एक महत्तवपूर्ण और विवादास्पद विषय हो सकता है यह जानकारी रखते हुए सभी धर्म के लोगों की भावनाओं का आदर और सम्मान करते हुए यह विचार पुस्तक के रूप में प्रकाशित करने जा रहा हूं... ताकी एडॉल्फ हिटलर के उन विचारों के पहलुओं पर भी प्रकाश डाला जा सके जिसे किसी ने उजागर करने की कोशिश ही न की हो……मेरा मानना है कि कोई भी घटना के दो पहलू हो सकते है...(एक अच्छा तो दूसरा बुरा…) मैं एडॉल्फ हिटलर के जीवन और उसकी सोच के दूसरे पक्ष पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहा हूं... जिसे किसी ने शायद ही सोचा होगा।…इस पुस्तक को पढ़ने के बाद संभवतः हैं कि एडॉल्फ हिटलर के प्रति हमारा देखने का समझने का और सोचने का नजरिया बदल जाए...अंत में...आपके सुझाव एवं विचारों का इंतजार जरुर रहेगा...