पढ़ेगी तो जरूर मेरी बेटी एक जागरूक मां और एक होनहार बेटी के जीवन की संघर्ष गाथा है । यह कहानी बताती है कि जीवन में अगर हम सपने देखते हैं तो नकारात्मक और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन सपनों को पूरा कर सकते हैं। गांव की एक अनपढ़ मां अपनी बेटी को पढ़ा लिखा कर उच्च स्तर पर ले जाने का सपना देखती है। उसकी बेटी अपनी मां के सपनों को संज्ञान लेती है और उनको पूरा करने के लिए जी तोड़ मेहनत करती है। मां और बेटी दोनों ही समाज की बातें सुनती हैं घर परिवार की बातें सुनती हैं नकारात्मक शक्तियां उनको कदम कदम पर पीछे धकेलती हैं। लेकिन मां और बेटी दोनों ही प्रतिबद्ध हैं कि उनको अपना मुकाम हासिल करना है ।मां बेटी की पढ़ाई के रास्ते में आने वाले सभी अड़चनों को एक-एक करके दूर करती है और बेटी हर परिस्थिति को अनुकूल बनाते हुए सफलता की सीढ़ियां चढ़ती जाती है ।जब सच्चे मन से कोई प्रयास किया जाता है तो अच्छे लोग मिलते हैं और यह पूरी कायनात सकारात्मक परिवेश बनाती है ।इस कहानी में कुछ ऐसा ही होता है। मां और बेटी दोनों को ही अच्छे लोग मिलते हैं जो उनकी मदद करते हैं और दोनों को अपना मुकाम पाने में मददगार साबित होते हैं। मां का संघर्ष और बेटी का जुनून रंग लाता है। और कहानी के अंत में वह होता है जो एक सपने में घटित होने जैसा है। यह कहानी बताती है कि शिक्षा का क्या महत्व है? अगर हम किसी चीज को ठान लेंगे तो उसे हम प्राप्त करके ही रहेंगे ।मानव जीवन के मूल्यों उनके संघर्षों नारी जीवन के गौरवमयी गाथा और सफलता प्राप्त करने के जुनून की अनोखी कहानी पढ़ेगी तो जरूर मेरी बेटी हर बेटी हर मां और अपने समाज को समर्पित है।