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About The Book
Description
Author
विमलेश त्रिपाठी की कविताएँ गहन संवेदनशीलता और सामाजिक-सांस्कृतिक चेतना को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती हैं। वे व्यक्तिगत और सामूहिक अनुभवों के जटिल ताने-बाने से बुनी हुई हैं जहाँ समाज की विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य मिलता है। उनकी कविताएँ हाशिए पर रहने वाले लोगों की पीड़ा और संघर्ष का सजीव चित्रण करती हैं। स्त्री जीवन पर उनकी कविताएँ विशेष रूप से प्रभावशाली हैं जो स्त्रियों के सामाजिक और आर्थिक संघर्ष के साथ उनकी संवेदनाओं और जटिलताओं को गहराई से उजागर करती हैं। उनकी रचनाएँ प्रेम ईश्वर और सांप्रदायिक सौहार्द जैसे विषयों को गहराई से स्पर्श करती हैं। कविताओं में क़िस्सागोई और शब्द-चित्रों की शृंखला है जो उन्हें सजीव और चाक्षुस बनाती है। गाँव की स्मृतियाँ और देशज भाषा का कुशल उपयोग उनकी कविताओं को जीवंतता प्रदान करता है। सामाजिक विडंबनाओं के प्रति उनकी कविताएँ न केवल आलोचना करती हैं बल्कि बेहतर विकल्प की कामना भी व्यक्त करती हैं। विमलेश की कविताएँ सत्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और विद्रोह को उजागर करती हैं जिससे वे युगद्रष्टा कवि के रूप में सामने आते हैं।~अभिज्ञात