आहट उन भावों की अभिव्यक्ति है जो मस्तिष्क के स्वभाव पक्ष और मानस पक्ष के मध्य से निसृत होती है। सरस्वती के उदगम से कविता निकलती है और पृष्ठों पर उतरती है। जैसेगंगोत्री से गंगा और यमुनोत्री से यमुना हरिद्वार और संगम आती है। रचनाकार कलम उठाकर रचता है और चित्रकार कूची उठाकर रंगों से खेलता है। जब विचार परिपक्व होने की 'आहट' होती है संवेदन और संप्रेषण होता है एक कलाकार अपनी कला दिखाता है। प्रत्येक रचना उसी ऊर्जा का परिवर्तित स्वरूप ही तो है।आहट* सुनकर हम सजग और सचेत हो जाते हैं लगता है: कोई दरवाजे पर कोई आया है? कौन हो सकता है? क्यों आया होगा? कैसे आया होगा? इस समय? जब तक दस्तक नहीं होता है स्वर और आवाज को साध नहीं लेते हैं दरवाजा नहीं खोलते हैं बल्कि खिड़कियां भी बंद कर लेते हैआहट एक पूर्वानुमान है आज का कल का और भविष्य का।यदि इसे हमने भांप लिया तो जीवन जिंदगी और कालचक्र सुधर सकता है।मेरी आहट में संकलित रचनाएं इन्हीं मनोभावों को प्रतिबिंबित करती है। हमें आशा है कि सभी पाठकों को रुचिकर प्रतीत होगा।मेरी बानगी कविता संग्रह के पश्चात आहट द्वितीय प्रस्तुति है जिसे 'साहित्य पीडिया' ने प्रकाशित किया है।*साहित्यपीडिया* और इसकी पूरी टीम को साधुवाद। आहट के लिए भी साधुवाद जिनके सार्थक प्रयासों से ही यह संभव हो सका है और मैं आपसे मिल रहा हूं। कोटिश: नमन। आभारी हूं।
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