असली गुनहगार का पता लगाने के लिए मैं कब्रिस्तान से लेकर श्मशान तक पहुंच गई इंस्पेक्टर फिर भी पता नहीं चला कि आखिर गुनाह किसका है तो भला आप पलभर में कैसे लगा लेंगे। --- शीतल अपने होंठों पर व्यंग्यात्मक मुस्कान लाकर बोली। सूरज कुछ कहने ही जा रहा था कि... शीतल वहीं चाकू अपने पेट में घोंप ली। आ...... एक बार फिर हाल गुंज उठा। मां........ सूरज चिल्ला उठा। जल्लाद बनकर जो जिए संसार है उसी का मरते दम तक न समझ पाती यह गुनाह है किसका ।