एक आलू था - सब लोग उसे चिढ़ाते रहते थे कि आखिर यह कैसा अजीब-सा नाम है तुम्हारा - आलू! आलू तो एक तरकारी होती है। बेचारा आलू जब भी ऐसा सुनता तो रोने लग जाता। बताओ ज़रा वो आलू था कौन! पर वहाँ एक भली-सी बैगन सुंदरी भी थी जो आलू को बिल्कुल नहीं चिढ़ाती थी। उल्टे उसका ख़ूब ध्यान रखती थी।क्या पता है आलू और बैंगन सुंदरी की कहानी?आखिर वो बैंगन सुंदरी क्यों नहीं चिढ़ाती थी आलू को?अब यह तो इस कहानी को पढ़कर ही पता चलेगा!इस कहानी संग्रह में इसी प्रकार की सोलह बड़ी रोचक कहानियाँ हैं।इन बाल कहानियों में अनावश्यक विस्तार या उपदेश नहीं है बल्कि और मस्तिष्क को कल्पना की नई उड़ान देकर भावनाओं के जुड़ाव का माध्यम बनती हैं।