‘आना मेरे गाँव’ विनोद साँवरिया जी ये काव्य कृति इन्हीं अनुभूतियों पर आधारित है इस कृति के गीतों का सौन्दर्य ये है कि ये ग्राम्य जीवन और शहरी जीवन में प्रेम की अनुभूतियों का बहुत सुन्दर सम्मिलन है गीतों को पढ़ते-पढ़ते हम कब गाँव की नटखट नदी की चंचल लहरों से अठखेलियों और खेत की पगडंडियों से निकलकर महानगर