ग्रामीण पृष्ठभूमि पर आधारित इस उपन्यास में सीमांत कृषक परिवार के दो नवयुवकों द्वारा गाँव के उत्थान की रोचक कथा गहन संवेदना के साथ बुनी गयी है।... दोनों ने महानगर में रहकर परास्नातक तक पढ़ाई की है पर नौकरी का मोह छोड़ वे गाँव की समस्याओं को दूर करने में जुट जाते हैं। वे गाँधी जी के इस विचार से अत्यंत प्रेरित हैं कि देश के विकास का रास्ता ग्रामीण उद्योगों से होकर जाता है। छोटे किसानों और मजदूरों की समस्याओं को दूर करने का वे एक स्वप्न देखते हैं और उसे पूरा करने में लग जाते हैं।... स्थानीय राजनीति धर्म-जाति आधारित फूट अशिक्षा शराब आदि बाधाओं से लड़ते हुए वे अंतत: सफल होते हैं।