आंसुओं की काजल” उस लड़की की कहानी है जो अपने नाम और व्यक्तितत्व के अनुरूप जिसके भी करीब जाती है उसकी आँखों में आंसू ला देती है! बचपन में ही अपने चेहरे की ख़ूबसूरती खो देने वाली ये लड़की हमेशा ही खुद को कोसती रहती है! अपनी इस जिल्लत भरी जिन्दगी की वजह वो अपने बचपन के सबसे अच्छे दोस्त ‘राज’ को समझती है जो आठ साल की कच्ची उम्र में ही यतीम हो जाने से उसी के घर में रहता है और वहीं पलकर बड़ा होता है! जहां ‘राज’ काजल को निराशा से बचाने के लिए बचपन से बड़े होने तक न जाने कितने ही आईने तोड़ता है पर इससे काजल की नफरत जरा भी कम नहीं होती! आखिरकार उसे कुछ ऐसा करना पड़ता है जिससे काजल की ख़ूबसूरती तो लौट आती है पर उसे तो फिर भी नाउम्मीद ही होना पड़ता है! काजल ठीक होते ही किसी और से दिल लगा बैठती है! इतना ही नहीं अपनी नासमझी के चलते वो एक साइको से दुश्मनी मोल ले लेती है जिसका परिणाम भी उसे नहीं बल्कि राज को ही भुगतना पड़ता है और वो भी अपनी एक आँख की रोशनी गंवाकर! इन सबके बावजूद काजल को राज पर प्यार आना तो दूर तरस तक नहीं आता है! इतना ही नहीं ‘ग्रहण’ की उपाधि देकर वो उसे न सिर्फ अपने घर से बल्कि अपनी जिन्दगी से भी दूर चले जाने को कह देती है! राज भी हालांकि उसके सामने कभी न आने का वादा कर के चला जाता है पर उसकी शादी के दिन ही उसे लौटना पड़ता है जहां तोहफे के रूप में उसे इस बार अपनी जान देनी पड़ती है!