‘आशाओं पर टिके परिंदे’ पुस्तक में एक ऐसा दर्पण है जो उन सीप में छिपे हुए मोतियों को यह दिखाने का प्रयास करेगा कि यह दुनिया कितनी सहज और सरल है। इस पुस्तक में लिखी गई कहानियाँ यह भी बताएंगी कि दुनिया के अनेकानेक रंगों से घबराना नहीं है बल्कि उन्हीं रंगों में से अपने लिए एक रंग को कैसे चुन लेना है। हर वो पाठक जिन्हें थोड़ा बहुत भी ऐसा लगता हो कि हताशा ही उनके जीवन का अंतिम बिन्दु है तो उनके लिए मेरी कहानियाँ प्रारंभ बिन्दु होंगी।----------------------------------------1. इस किताब की कहानियाँ मानो कुछ कह रही हैं। लेखन कला अद्भुत है। ‘आशाओं पर टिके परिंदे’ किताब को मेरा ढेर सारा प्यार एवं आशीर्वाद! - अदिश सी अग्रवाल (Senior Advocate; President International Council of Jurists London; Outgoing President Supreme Court BarAssociation; Chairman All India Bar Association)2. मेरे प्यारे बच्चे अम्बरीश तुम्हारी लेखनी ने मेरे हृदय को हतप्रभ कर दिया है। पुस्तक में लिखी कहानियाँ वाकई खूबसूरत हैं। - जेबा खैर (Senior Advocate Delhi High Court)3. पुस्तक की कहानियों की भाषा सहज और सरल है। उम्मीद है कि हर पाठक कहानियों में खुद को ढूंढ पाएगा। - Inzmam Khan (Advocate Supreme Court of India)