आत्म पूजा उपनिषद पार्ट-1बुद्धत्व की प्रवाहमान धारा में ओशो एक नया प्रारंभ हैं वे अतीत की किसी भी धार्मिक परंपरा या शृंखला की कड़ी नहीं हैं। ओशो से एक नये युग का शुभारंभ होता है और उनके साथ ही समय दो सुस्पष्ट खंडों में विभाजित होता है : ओशो पूर्व तथा ओशो पश्चात । ओशो के आगमन से एक नये मनुष्य का एक नये जमत का एक नये युग का सूत्रपात हुआ है जिसकी आधारशिला अतीत के किसी धर्म में नहीं है किसी दार्शनिक विचार-पद्धति में नहीं है। ओशो सद्यः स्नात धार्मिकता के प्रथम पुरुष हैं सर्वथा अनूठे संबुद्ध रहस्यदर्शी हैं।एक एक कदममैं आपको कहूं कि कोई कितना भी कमजोर हो एक कदम उठाने की सामर्थ्य सबमें है। हजार मील चलने की न हो हिमालय चढ़ने की न हो लेकिन एक कदम उठा लेने की सामर्थ्य सबके भीतर है। अगर हम थोड़ा सा साहस जुटाएं तो एक कदम निश्चित ही उठा सकते हैं।...एक कदम सबके लिए काफी है क्योंकि दो कदम कोई भी एक साथ नहीं उठा सकता है। एक ही कदम उठाने की सामर्थ्य जुटा लेने की बात है। और उतनी सामर्थ्य प्रत्येक में है जो जीवित है।ओशोपुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदु: भारत और भारत के लोग अहिंसात्मक क्रांति का क्या अर्थ है? प्रेम संतति-नियमन जिज्ञासा.