शां... डिल्य को खूब हृदयपूर्वक समझना। शांडिल्य बड़ा स्वाभाविक सहजयोग प्रस्तावित कर रहे हैं। जो सहज है वही सत्य है। जो असहज हो उसे सावधान रहना। असहज में उलझे तो जटिलताएं पैदा कर लोगे। सहज से चले तो बिना अड़चन के पहुंच जाओगे। इन अपूर्व सूत्रों पर खूब ध्यान करना। इनके रस में बना। एक-एक सूत्र ऐसा बहुमूल्य है कि तुम पूरे जीवन से भी चुकाना चाहो तो उसकी कीमत नहीं चुकाई जा सकती।