आलोक अग्रवाल की पैनी नजर जीवन के विभिन्न आयामों को बखूबी बताती है! वह कहते हैं कि वर्तमान में जियो वर्तमान पल अटल है भाई जीने का मतलब इस पत्र में जो बीता वह बीत गया आनंद नहीं छिपा है कल में जीवन में शारीरिक रूप से कैसे स्वस्थ रहें इस हेतु उपनिषदों में वर्णित पद्धतियों का उन्होंने बखूबी इस संकलन में वर्णन किया है सुखासन में बैठ कर विचारों को दें बिराम । आँख बंद कर धरे आज्ञा चक्र पर ध्यान || आज्ञाचक्र का ध्यान मन करता है शांत। वाह सब खत्म हो जातीं इसके उपरान्त ।। ये संकलन जहां एक ओर आत्म मंथन को दर्शाता है दूसरी ओर जीवन जीने के छोटे छोटे तरीके भी बताता हैं जीवन के हरएक पल को सीखो खुलकर जीना । एक इम्तहाँ है जीवन जिंदगी हो सबकी सफीना। लक्ष्य सामने फिर क्यूँ डरना जीत इरादों से होती। गर मज़बूत इरादा हो तो पत्थर को आये पसीना ।। हिंदी और उर्दू दोनों पर ही उनके बराबर पकड़ है एवं वह कहते हैं कि जिंदगी की तल्खियां कुछ गज़ब सा कर गई छोड़ कर दामन खुदी का दिल में अरमां भर गई यह काव्य संकलन भावनाओ के समुद्र में जीवन को दिशा देने वाला एक यंत्र के रुप में कारगर होगा यह कवि का विश्वास है
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