जीवन पथ के हर पड़ाव पर आवश्यक सुधार चाहिएबचाना है मानव मूल्यों को तो नित नए संस्कार चाहिए।मेरा नाम जितेन्द्र बार्वे है। मैं मुकाम पोस्ट लवन जिला बलौदाबाजार –भाटापारा (छत्तीसगढ़) का निवासी हूं। मैंने 12वीं तक की शिक्षा अपने पैतृक ग्राम लवन के सरकारी स्कूल से ही पूरी की। 12वीं के बाद घर की आर्थिक परिस्थिति ठीक नहीं होने के कारण मैंने प्राइवेट स्कूल में शिक्षण कार्य शुरू कर दिया औरलम्बे अंतराल के पश्चात मैंने अपनी अधूरी पढ़ाई अर्थात कॉलेज (BSC+MSC Maths) प्राइवेट पूरी की। घर की परिस्थितियां जैसे-जैसे ठीक होती गईं मैंने आगे डीएड और बीएड भी किया। 15 वर्षों तक विभिन्न प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाने के बाद अंततः 2019 में मुझे शासकीय नौकरी मिल गई। वर्तमान में मैं शासकीय शिक्षक के पद पर कार्यरत हूं।मेरा बचपन कठिनाइयों और संघर्षों से जूझता हुआ निकला है। मैंने अपने लेखन की शुरुआत बचपन में जब मैं कक्षा 10 में था तब से ही कर दी थी। मैं किसी एक विशेष विषय पर ही नहीं वरन् उन प्रत्येक विषयों पर लिखने का प्रयास करता था जहां तक मैं अपने विवेक से तर्क कर सकता था। मेरे हर लेख को परिचित/अपरिचित सभी लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिलने लगीं और धीरे-धीरे मेरी लेखन में रुचि और भी अधिक बढ़ने लगी। अंततः मेरे जीवन की पहली पुस्तक आत्म प्रेरणा के शब्द जो मेरे लिए हर कठिन समय में मेरा एक अभिन्न साथी रहा है आपके लिए प्रस्तुत कर रहा हूं।