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About The Book
Description
Author
रमेश जी जम्मू-कश्मीर जैसे अहिन्दी भाषी प्रांत के एक प्रतिष्ठित हिन्दी कवि हैं। उनकी रचनाएं आस-पास के समाज से उपजी हैं। उनकी रचनाएं मन का द्वार खटखटाती नहीं अपितु सीधी अंतस में जा उतरती हैं। उनका काव्य अनुभूतियों संवेदनाओं वात्सलय रहस्यवादी चिंतन का काव्य है । कवि उस समाज की बात करता है जिसका स्वयं वह हिस्सा है। वह बड़ी सहजता और अपनी रचनाओं भावनाओं से पाठक को रू-ब-रू करता है।जहां मानवीय संवदेना भूख-प्यास और मानसिक पीड़ा है वहां आत्म-सम्मान और खुद्दारी के सजीव चित्र भी आपको मिलेंगे-“आसमान हूँ सूरज की रोशनीअपने साथ लिये चलता हूँ मैंया फिरमैं समुद्र हूँ गहराबहुत कुछ समेटे हुए।बरगद का पेड़ हूँअपने में वक्त लपेटे हुए।”