‘आत्मजयी’ केवल एक उपन्यास नहीं बल्कि एक आंदोलन है-विचारों का मूल्यों का और विवेक का। यह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र अनुराग शर्मा की गाथा है जिसने सिविल सेवा जैसी प्रतिष्ठित नौकरी को ठुकराकर एक उद्देश्यपूर्ण संघर्ष का रास्ता चुना-अराजकता सत्ता-सांठगांठ और विश्वविद्यालय की जड़ता के खिलाफ़।वीरेन्द्र ओझा की लेखनी में छात्र जीवन की बेचैनी युवा मन की ऊहापोह और व्यवस्था से टकराने का जज़्बा एक साथ साँस लेते हैं। उपन्यास इतनी प्रामाणिकता और ऊर्जा से भरा है कि पाठक खुद को घटनाओं का हिस्सा महसूस करने लगता है।यह किताब उन सभी के लिए है जो सिर्फ़ जीवन नहीं संघर्ष और परिवर्तन भी जीना चाहते हैं।