डॉ. मोहन नागर एक कुशल चिकित्सक होने के साथ-साथ एक संवेदनशील कवि भी हैं। उन्होंने यह सामर्थ्य कठिन जीवन संघर्षों को पारकर प्राप्त की है। इन संघर्षों का असर उनकी रचनाशीलता पर साफ देखा जा सकता है। मोहन की छोटी कविताएँ विचार-सूत्रों की तरह मालूम होती हैं। इनकी कविताओं में लोकजीवन की महक है अपनापन है सरलता है विश्वसनीयता है विविधता है और लेखकीय ईमानदारी की स्पष्ट छाप भी है। लोकजीवन की सादगी और देशज भाषा का ठाठ इनकी कविताओं की मुख्य विशेषता है।