कविता अंर्तमन की उर्वश सतह पर जन्म लेती है। जब दिल भावनाओं और कल्पनाओं की नाजुक डोर थामकर कभी आसमान की ऊँचाई में विचर रहा होता है या सागर की अथाह गहराई में दुनिया से बेपरवाह गोते लगा रहा होता है या पर्वतों जंगलों और बर्फ के विस्तार में बेलगाम भटक रहा होता है तब जिंदगी के सुंदर लम्हें शब्दों के रूप में कविता बनकर दिल की जमींन पर जन्म लेते हैं। उम्मीद करती हूँ दिल से दिल की राह जरूर मिलेगी।