जीवन की यात्रा में अनेकों पड़ाव उतार चढ़ाव और घटनाएं आती रहती है। दिनचर्या से बंधे मनुष्य को इनमें से कुछ एक अनुभव याद रह जाते है और इनके साथ जब समाज और देश में चल रही घटनाएं दिमाग में जुड़ जाती है तो अजीब सा कौतूहल मचा देती है। जब ये कौतूहल उच्च सीमा तक पहुंच जाता है तो आख़िरकार व्यक्ति कलम उठा कर लिखने का आगाज़ कर ही देता है जैसा हमारे इस पुस्तक के लेखक धीरज व्यास ने कर दिया। पेशे से लेखाशास्त्र के शिक्षक और लेखाकार धीरज व्यास राजस्थान के पाली शहर में रहते है। पढ़ने और पढ़ाने का उन्हे बहुत शौक है। कविता और कहानियों को माध्यम चुन कर उन्होंने अपनी बात इस पुस्तक में बताई है।