<b>‘अबूझ जीवन के चौराहे’</b> छह कहानियों का संग्रह है जो आम ज़िंदगी के खास मोड़ों पर रुककर हमें सोचने को मजबूर करती हैं। ये कहानियाँ रिश्तों की उलझनों स्त्रियों की आत्मिक खोज परिवारों के भीतर के द्वंद्व और छोटे शहरों के मनोविज्ञान को बहुत सादगी से उजागर करती हैं। कभी यह हमें प्रेम और अकेलेपन के बीच झूलते किरदारों से मिलवाती हैं तो कभी एक बूढ़ी माँ की चुप्पियों को शब्द देती हैं।<p>यह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो जीवन की हलचलों को समझना चाहते हैं—बिना शोर बिना अतिनाटकीयता के। यहाँ कहानियाँ धीरे-धीरे खुलती हैं जैसे किसी पुराने संदूक से कोई भूली-बिसरी चिट्ठी।</p?