मैं हिंदी प्राध्यापक के रूप में अध्यापन करता था। पढ़ाते समय ब्रह्मा सरस्वती गायत्री आदि के जीवन चरित्र के बारे में बच्चों के समक्ष व्याख्या करना उचित नहीं लगता था फिर अनुष्ठानों में तो सब से पहले इन्हीं का नाम लिया जाता है जो मुझे तर्क संगत नहीं लगता था। मैं प्रिंसिपल सेवानिवृत हुआ हूँ और आदर्श गुरुओं के बारे में लिखने का कार्य कर रहा हूँ। आदर्श कर्मकांड लिखने का विशेष उद्देश्य यह है कि भारत में ब्राह्मणों और पुरोहितों द्वारा जितने भी कर्मकांड किये जाते हैं वे संस्कृत भाषा में पढ़े व सुनाए जाते हैं जिस भाषा को कोई भी समझ नहीं पाता है जिन देवताओं के नाम से शुभ अनुष्ठान शुरू होते हैं उन का स्वयं का चरित्र कलंकित है इसीलिए प्रस्तुत पुस्तक चरित्रवान महापुरुषों गुरुओं द्वारा तैयार कर्मकांडों को संगृहीत कर के लिखी गई है ताकि आम आदमी इस की भाषा को समझ कर चरित्रवान महापुरुषों द्वारा लिखे गए सभी कर्मकांडों और अनुष्ठानो की शुरुआत कर सकें।
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