About the Book: स्वतंत्रता आन्दोलन हेतु नव-सेनानी निर्माण के उद्देश्य से युवा क्रांतिकारियों द्वारा 1943 ई. से आरम्भ हुई यह कथा परतंत्रता की दीर्घ तमस्विनी में 1861 ई. के पृष्ठभूमि पर एक वसुंधरा-भक्त सेनानी के स्वाधीनता संघर्ष पर आधारित है जिसे प्रतिवेशी सत्ताधारियों के षड्यंत्र द्वारा राज्य से निष्कासित कर दिया जाता है किन्तु विषम परिस्थितियों के पश्चात भी उसने अनेक बाधाओं को सहर्ष सहते हुए गिरी-कंदराओं में आश्रय लेकर अपने साथियों व युवाओं की सहायता से सेनानियों का समूह तैयार कर योजनाबद्ध नीतियों द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध अपने स्तर पर ‘स्वतंत्रता का सिंहनाद’ किया |About the Author: शिक्षा व साहित्य के क्षेत्र में इनकी विशेष रूचि रखने वाले एस अंशु धुरंधर एक YouTuber (काव्य सिंहनाद) और लेखक हैं | विभिन्न भाषण व वाद-विवाद सम्मेलनों में भाग ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन लोगों में शिक्षा की जागरूकता बढ़ाने हेतु स्कूल आदि स्थानों पर कार्यक्रम संचालित एवं क्षेत्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों में अपनी प्रस्तुति देते आये हैं | बाल क्रांतिकारी सरस्वती थॉट्स झोपडी में दीवाली शिक्षक हमे इससे क्या? व प्रेम के वियोग में आदि इनकी अन्य रचनाएँ हैं | kavyasinhnaad@gmail.com
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