इस उपन्यास में पंजाब की संस्कृति और वहां के लोगों के जीवन को जीवंत ढंग से उकेरा गया है। इसे लिखना महज संयोग ही था। वह पहाड़ पर एक संत की कुटिया में गए। बाबा ने अपनी आपबीती सुनाई। एक दर्दभरी दास्तान थी। संत बाबा की स्मृति में वह डूब गए और जब आपबीती खत्म हुई तो दोनों की आंखें नम थी|