Adhunik Dali Itihas Ke Nirmata
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About The Book

उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में केरल में एक व्यक्ति बड़ी शान से सड़क पर एक बैल गाड़ी से जा रहा था। जो कृत्य एक सामान्य सी बात थी वह उस समय प्रतिरोध का एक बड़ा कृत्य था। घुड़ सवारी करना या बैलगाड़ी पर बैठने का अधिकार उस समय सिर्फ ऊँची जातियों के लोगों के पास था। लेकिन अछूत कही जाने वाली पुलया जाति का वह व्यक्ति जाति आधारित भेदभावों को चुनौती दे रहा था। वह कोई और नहीं बल्कि समाज सुधारक और आन्दोलनकारी अय्यनकाली थे।इस पुस्तक में ऐसे ही प्रेरक व्यक्तित्वों के विवरण हैं जिन्होंने जीवन भर भेदभाव के खिलाफ अथक लड़ाई लड़ी। यह पुस्तक दलित समुदाय के प्रति आधुनिक भारत की उसी समझ को विस्तृत करने के प्रयास के तहत लिखी गई है।भीमराव आम्बेडकर बाबू जगजीवन राम गुरराम जेशुवा केआर नारायणन सोयराबाई रानी झलकारीबाई और उन जैसे कई अन्य ऐतिहासिक और समकालीन व्यक्तित्वों के ऊपर मौलिक शोध पर आधिरत आधुनिक दलित इतिहास के निर्माता दलित विमर्श में एक महत्वपूर्ण योगदान है। अतीत और वर्तमान के कुछ अग्रणी दलित चिंतकों के ऊपर लिखी गई यह लकीर खींचने वाली किताब दलित पहचान इतिहास और राजनीति पर ज़रूरी बहस को शुरू करने का लक्ष्य रखती है।
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