इस कहानी का प्रारंभ 15000 ईसा पूर्व से होता है जहाँ पर रुद्र अपने साथियों के साथ कैलाश पर्वत की ओर बढ़ रहे हैं। रुद्र का जीवन बड़ा ही रहस्यमयी है। उनके विषय में जितना जानते जाओ रहस्य उतने ही गहरे होते जाते हैं। हिमाचल के मंतलाई नाम के स्थान पर रुद्र की भेंट मंतलाई की राजकुमारी और राजा हिमान की पुत्री शिवी से होती है। धीरे-धीरे दोनों में प्रेम बढ़ता है और उनके विवाह की बात होने लगती है। किंतु रुद्र एक वनवासी हैं एवं शिवी एक राजकुमारी । शिवी की माता मीना को यह संबंध स्वीकार नहीं है। इतना ही नहीं राजा सुधांत के रूप में मंतलाई के द्वार पर एक भयावह संकट का आगमन हो चुका है। रुद्र और शिवी की प्रेम कथा कठिन परिस्थितियों का सामना कर ही रही थी कि तभी कनखल नरेश प्रजापति भी महाराज हिमान को रुद्र के विषय में एक ऐसी जानकारी देते हैं कि मानो हिमान के चरणों के नीचे से किसी ने आधार खींच लिया हो। शिवी और रुद्र का अटूट प्रेम कैसे अपने परिणाम तक पहुँचेगा; इसी रोचक यात्रा का नाम है 'आदिदेव - विश्व की प्रथम प्रेम कथा ।'
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