यह पुस्तक प्रेम भाव से परिपूर्ण कविताओं का संग्रह है। प्रेम आत्मा का विषय है, शरीर का नहीं। सच्चे और आत्मिक प्रेम में भोग वासना, आसक्ति, मोह, पीड़ा, दुःख, शोक आदि विकार कभी नहीं होते। यह तो आत्मा की ही तरह अविकारी और पवित्र होता है। अहंकारी, अभिमानी और स्वार्थी हृदय में कभी भी प्रेम की अनुभूति नहीं हो सकती। प्रेम उपासना के लिए हृदय की शुद्धि आवश्यक है।