ये पुस्तक हम सबके बारे में है। इसमें मैंने जो भी अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यक्त करने का प्रयास किया है वो आप सभी को बड़ा परिचित सा लगेगा।ये ज़िन्दगी को हम आजकल जैसे जीते हैं उसको कुछ हद तक दर्शाने का एक प्रयास है। साथ ही ये रचनाएँ शायद आपको कुछ सोचने पर भी मजबूर कर सकती हैं कि हम जिसे जीना कहते हैं क्या वो सच में जीना है? हम जी रहे हैं या सिर्फ जिए जा रहे हैं। मुझे इस पूरी प्रक्रिया में कई बार ऐसा महसूस हुआ मानो मैं इन रचनाओं को व्यक्त करने में मात्र एक माध्यम हूँ। विचार कहीं और से आ रहे हैं। ये एहसास काफी अलग था| आप ज़रूर बताएं कि आप सबको मेरा ये छोटा सा प्रयास कैसा लगा। आपके सुझावों एवं reviews का इंतज़ार रहेगा।