ब्रह्मचर्य समस्त साधनाओं का मूल आधार है। जिसे अपनाएं बिना आत्मा की उपलब्धि असंभव है। ब्रह्मचर्य की साधना महान साधना है। भारत भूमि सदा से ही धर्म स्थली रही है । यहाँ सदा से ही सन्त महात्मा ओर अवतार होते रहे हैं । सदगुरु जो स्वयं ब्रह्म है.निराकर है निर्विकार है वही ब्रह्म जगत कल्याणार्थ के लिए मातृ भाव मे साकार हो कर पथ प्रदर्शित करता है। गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है गुरु वह शक्ति है जो हमें परमात्मा से मिलाने का मार्ग बताता है।