लगभग पाँच दशक तक भारत के विभिन्न स्थानों के विभिन्न प्रकार के स्कूलों में अध्यापन करने के बाद मैंने देखा कि बच्चों में पढ़ने की आदत का प्रचुर मात्रा में अभाव है। हिन्दी में ज्ञानवर्धक किताबों का अभाव नहीं है। धार्मिक तथा पौराणिक कथाओं के साथ जातक पंचतन्त्र और ईशप जैसी कहानियों की किताबों की कमी भी नज़र नहीं आती। समय-समय पर विभिन्न प्रकाशकों के द्वारा ये किताबें प्रकाशित होती रहती हैं। मुझे लगा कि मात्र आनन्द के लिए खाली समय में पढ़ने के लिए हिन्दी भाषा में प्रकाशित मौलिक किताबों का अभाव हसालों बच्चों के बीच रहने के बाद यह लाजमी या स्वाभाविक था कि मेरी कहानियों के पात्र वे ही हों। इस किताब में बच्चों के द्वारा किये गये सही-ग़लत कामों के इर्द-गिर्द घूमते किस्सों को लेकर उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमती ये कहानियाँ हैं। इसी कारण इस पुस्तक को बच्चों के लिए कहा गया है। ये कहानियाँ कहीं की भी हो सकती हैं। सारी दुनिया के एक समय के किसी एक आयु वर्ग के बच्चे मूलतः लगभग एक से ही बर्ताव करते हैं। किसी की खिल्ली नहीं उड़ाई गई महज रोचक क़िस्सों को वर्णित किया गया। देखा जाय तो ये कहानियाँ किसी भी आयु के पाठकों के लिए उतनी ही रोचक हैं।